पड़ाव

-Poem by Aman

सड़क के बीचोंबीच लेटीं 

जान से बेपरवाह 

उजली पट्टियाँ और

सड़क किनारे खड़े

पैरों में थकान से इतर

भारी खंभे

पूरे रास्ते साथ चलने से

इंकार कर देंगे,

एक दिन।

ट्रेनों के सामान्य श्रेणी में

सफ़र करते लोग

राजनीति की चर्चा और

एक सीट पर पाँच को

एक-एक अंगुल में बैठ जाने की 

ज़िद करना छोड़ देंगे,

एक दिन।

अत्याधुनिक मशीनें जो 

संवेदनाओं से ओत-प्रोत और

समूचे दिन नौकरी करने में

 सक्षम होंगे

काम करना बंद कर देंगे

अचानक ही,

एक दिन।

धरती बीच दुपहरिया में कभी

घूमना-फ़िरना छोड़कर

कहीं आराम करने को ठहरेगी

किसी के हठ करने पर भी

नहीं जागेगी और

सोयेगी बहुत देर तक

बेफ़िक्र होकर,

एक दिन।

ऊब से, या थकान से, या कि

साँस रुकने से ।


और इन सबके बीच

एक दिन

कुछ समय निकालकर

मैं भी कवितायें लिखना छोड़ दूंगा!

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